सीता जी का हरण करके रावण जब अशोक वाटिका ले कर गया तो

माता की खोज चारों दिशाओं में जोर शोर से होने लगी

सीता जी की खोज करते-करते जब हनुमान जी लंका के अशोक वाटिका पहुंचे तो उन्होंने

मां सीता को प्रभु श्री राम मुद्रिका दिखाई सीता जी को ये मायावी लगा

तब सीता जी ने कहा की मैं कैसे विश्वास करू की ये मुद्रिका राम जी की है

तब हनुमान जी माता सीता के सन्मुख नतमस्तक होकर शपथ ग्रहण करते हुए कहते है

राम दूत मैं मातु जानकी। सत्य शपथ करूणानिधान की ||

हनुमान के मुख से करूणानिधान नाम सुनकर सीता जी को विश्वास हो गया

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