जय माता की
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा अर्थात हिंदी नव वर्ष का प्रथम दिन जो अंग्रेजी तारीख के अनुसार 19 मार्च दिन गुरुवार को प्रारंभ हो रहा है सबसे महत्वपूर्ण दिवस माना जाता है यह दिवस इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आज के दिन ही ब्रह्मा जी ने सृष्टि के साथ समस्त जीव जगत की रचना की थी इसलिए आज के दिन हर सनातन धर्म में महोत्सव के रूप में मनाते हैं आज के दिन जो वार पड़ता है उसी को वर्ष का राजा मानते हैं इस बार राजा गुरु है मंत्री मंगल है
चैत्र नव वर्ष का पवित्र पर्व भी आज से प्रारंभ हो जाता है अपना घर साफ सफाई तोरण आदि से सुसज्जित करके शास्त्र सम्मत का पालन कर नव वर्ष का हर्षो उल्लास के साथ मां भगवती का ध्यान करके स्वागत करना चाहिए
प्रत्येक सनातन धर्म को आज के दिन तेल उबटन आदि लगा करके स्नान कर नया वस्त्र धारण करके धर्म का पालन करते हुए घर के ऊपर जय श्री राम या फिर बजरंगबली का छठ के ऊपर ध्वज लगाना चाहिए आज के दिन ब्राह्मण विद्वान से पंचांग फल इस श्रवण करना चाहिए तथा बृहस्पति गुरु का पूजन करते हुए काली मिर्च मिश्री ओम नीम की नीम की कोकलो का सेवन करना त्री दोस सर्व रोग निवारक है चैत्र नवरात्र में भगवती के नव रूपों की आराधना ईस्ट फल को प्रदान करने वाले होते हैं इस वर्ष नवरात्र नव दिन का है भागवत के अनुसार मां दुर्गा का वाहन शेर है लेकिन हर वर्ष देवी अलग-अलग वहन पर सवार होकर आती आती है गुरुवार के दिन कलश स्थापना होने पर मां भगवती दुर्गा जी झूला पर सवार होकर आती है जिसका फल प्रजा में विग्रह होता है शनिवार के दिन विजयदशमी होने से मां भगवती का प्रस्थान मुर्गा वाहन से होता है कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त प्रातः 7:30 से 10:00 तक मध्यान 11:45 से 12:33 तक सर्वोत्तम माना गया है मां अंबे का आशीर्वाद सारे जगत को प्राप्त हो
जय माता की
