triphala churna त्रिफला चूर्ण के फायदे, सेवन विधि, सही मात्रा, नुकसान और सावधानियां

triphala churna त्रिफला के फायदे सेवन विधि नुकसान सही मात्रा | त्रिफला चूर्ण बनाने की सही विधि 2026

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triphala churna त्रिफला क्या है? जानिए आयुर्वेद का प्रसिद्ध रसायन

भारत की आयुर्वेद परंपरा हजारों वर्षों पुरानी है। हमारे ऋषि-मुनियों और आयुर्वेदाचार्यों ने अनेक ऐसी प्राकृतिक औषधियों का वर्णन किया है, जिनका उद्देश्य शरीर को स्वस्थ रखना और जीवनशैली को संतुलित बनाना है। इन्हीं में से एक अत्यंत प्रसिद्ध ऋषि हुए बागभट्ट जिन्होंने अपनी पुस्तक में इस आयुर्वेदिक योग त्रिफला चूर्ण का वर्णन किया है।

त्रिफला का अर्थ है तीन फलों का मिश्रण या तीन औषधीय फलों का मिश्रण जिनसे इसे तैयार किया जाता है।

हरड़ (हरितकी)

बहेड़ा (विभीतकी)

आंवला (आमलकी)

आयुर्वेद में triphala churna को एक रसायन (Rejuvenative Formulation) माना गया है, अर्थात ऐसा योग जो शरीर के पोषण, पाचन और संतुलन में सहायता करता है। यह दुनिया का एकमात्र ऐसा चूर्ण है जो पोषण का भी काम करता है और रेचक (सफाई) का भी काम करता है।

त्रिफला कैसे बनाया जाता है?

परंपरागत आयुर्वेद के अनुसार त्रिफला का अनुपात इस प्रकार बताया गया है 1:2:3 कुछ विशेषज्ञ इसे समान मात्रा में बनाने का सुझाव देते हैं जैसे 1:1:1 परंतु यह बहुत कम परिस्थितियों में उपयोग किया जाता है। वाग्भट संहिता में 1:2:3 के अनुपात का वर्णन है

  • 1 भाग हरड़
  • 2 भाग बहेड़ा
  • 3 भाग आंवला

इन तीनों फलों को सुखाकर बारीक पीस लिया जाता है। अच्छी गुणवत्ता वाला त्रिफला हल्के भूरे रंग का होता है और इसमें किसी प्रकार की मिलावट नहीं होनी चाहिए।

यहां ध्यान देने वाली बात यह है जब भी आप इसको बनाएं एक बार में बनाया हुआ चूर्ण 3 महीने से अधिक उपयोग में नहीं लेना है।

आयुर्वेद में त्रिफला का महत्व

आयुर्वेद के अनुसार शरीर के स्वास्थ्य का आधार वात, पित्त और कफ का संतुलन है। जब इन तीनों दोषों का संतुलन बिगड़ता है, तब विभिन्न प्रकार की स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

परम्परागत मान्यता के अनुसार त्रिफला इन तीनों दोषों को संतुलित रखने में सहायक माना जाता है। इसी कारण इसे आयुर्वेद की सबसे लोकप्रिय औषधियों में जाना जाता है।

त्रिफला चूर्ण के फायदे

1. पाचन शक्ति को बेहतर बनाने में सहायक

त्रिफला का सबसे बड़ा उपयोग पाचन तंत्र के लिए माना जाता है। इसका नियमित और उचित मात्रा में सेवन कब्ज जैसी समस्या में सहायक हो सकता है।

2. कब्ज से राहत

कई लोग सुबह पेट पूरी तरह साफ न होने की समस्या से परेशान रहते हैं। आयुर्वेद में त्रिफला को प्राकृतिक रेचक (Mild Laxative) माना गया है, जो मल त्याग को आसान बनाने में सहायता कर सकता है।

3. शरीर में एंटीऑक्सीडेंट का स्रोत

आंवला प्राकृतिक रूप से विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर माना जाता है। इसलिए त्रिफला शरीर को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाने में सहायक हो सकता है।

4. रोग प्रतिरोधक क्षमता का समर्थन

संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली के साथ त्रिफला का सेवन शरीर की सामान्य प्रतिरक्षा क्षमता को सहयोग देता है।

5. त्वचा के लिए लाभकारी

triphala churna पारंपरिक रूप से माना जाता है कि बेहतर पाचन का सकारात्मक प्रभाव त्वचा पर भी दिखाई देता है। कुछ लोग स्वस्थ त्वचा बनाए रखने के लिए भी त्रिफला का सेवन करते हैं।

6. आंखों के स्वास्थ्य के लिए उपयोग

आयुर्वेद में त्रिफला को नेत्र स्वास्थ्य के लिए लाभकारी बताया गया है। हालांकि आंखों की किसी भी बीमारी के इलाज के लिए डॉक्टर की सलाह आवश्यक है।

7. वजन नियंत्रण करने में सहायक

यदि त्रिफला के साथ संतुलित भोजन और नियमित व्यायाम किया जाए, तो यह पाचन सुधारकर वजन नियंत्रण की प्रक्रिया में सहायक हो सकता है।

क्या त्रिफला डायबिटीज, थायरॉयड या हाई बीपी को ठीक कर देता है?

इंटरनेट पर कई जगह दावा किया जाता है कि त्रिफला डायबिटीज, थायरॉयड, हाई ब्लड प्रेशर या कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों को पूरी तरह ठीक कर देता है।

वर्तमान वैज्ञानिक प्रमाण ऐसे दावों की पुष्टि नहीं करते।

यदि आपको इनमें से कोई भी बीमारी है, तो डॉक्टर द्वारा दी गई दवा बंद नहीं करनी चाहिए। त्रिफला का सेवन केवल चिकित्सकीय सलाह के अनुसार ही करें।

त्रिफला में कौन-कौन से पोषक तत्व पाए जाते हैं?

त्रिफला में विभिन्न प्रकार के प्राकृतिक पौधीय तत्व पाए जाते हैं, जिनमें

  • विटामिन C (मुख्य रूप से आंवला)
  • पॉलीफेनॉल
  • टैनिन
  • फ्लेवोनॉइड्स
  • प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट

ये तत्व शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली को सहयोग देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

त्रिफला चूर्ण सेवन विधि या त्रिफला चूर्ण का सही सेवन कैसे करें?

triphala churna आयुर्वेद में सामान्यतः दो प्रकार से सेवन बताया जाता है

सुबह

यदि उद्देश्य सामान्य स्वास्थ्य बनाए रखना हो, तो कुछ लोग सुबह गुनगुने पानी के साथ इसका सेवन करते हैं। ऋतु के अनुसार सुबह में इसका सेवन अलग-अलग पदार्थों के साथ किया जाता है जिसका वर्णन आगे दिया गया है 

सुबह के समय खाया गया त्रिफला पोषण का काम करता है और रात में खाया गया त्रिफला रेचक का काम करता है

रात

यदि कब्ज की समस्या हो, तो कई आयुर्वेद चिकित्सक रात में सोने से पहले गुनगुने पानी के साथ triphala churna सेवन की सलाह देते हैं।

हालांकि, सही मात्रा और समय व्यक्ति की आयु, प्रकृति और स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। इसलिए व्यक्तिगत सलाह के लिए योग्य आयुर्वेद चिकित्सक से परामर्श लेना बेहतर होता है

त्रिफला चूर्ण की सही मात्रा व्यक्ति की आयु, स्वास्थ्य स्थिति और सेवन के उद्देश्य पर निर्भर करती है। सामान्यतः आयुर्वेद में निम्न मात्रा सुरक्षित मानी जाती है:

  • वयस्क (18 वर्ष से अधिक) 3-5 ग्राम (लगभग ½ से 1 चम्मच) दिन में एक बार।
  • कब्ज की समस्या होने पर: रात को सोने से 1-2 घंटे पहले गुनगुने पानी के साथ 3-5 ग्राम।
  • सामान्य स्वास्थ्य के लिए: सुबह खाली पेट या रात में चिकित्सक की सलाह के अनुसार 3-5 ग्राम।

सेवन का तरीका

  • गुनगुने पानी के साथ लें।
  • चाहें तो चिकित्सकीय सलाह पर शहद या घी के साथ भी लिया जा सकता है।
  • सेवन के बाद लगभग 30-60 मिनट तक कुछ न खाना बेहतर माना जाता है।

किन लोगों को बिना सलाह के त्रिफला नहीं लेना चाहिए?

  • गर्भवती महिलाएं
  • स्तनपान कराने वाली महिलाएं
  • 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चे
  • बार-बार दस्त या बहुत कमजोर पाचन वाले लोग
  • जो लोग नियमित दवाएं (जैसे डायबिटीज या ब्लड थिनर) लेते हैं

महत्वपूर्ण

 इंटरनेट पर उम्र के बराबर ग्राम (जैसे 40 वर्ष = 4.8 या 40×0.12 ग्राम) लेने जैसे कई दावे मिलते हैं, लेकिन यह आधुनिक चिकित्सा या मानक आयुर्वेदिक दिशानिर्देशों में सामान्य अनुशंसा नहीं है।

अधिकांश लोगों के लिए 3-5 ग्राम प्रतिदिन पर्याप्त माना जाता है। यदि किसी विशेष रोग के लिए लेना चाहते हैं, तो किसी योग्य आयुर्वेद चिकित्सक से व्यक्तिगत सलाह लें। हर व्यक्ति के लिए त्रिफला उपयुक्त नहीं होता।

निम्न लोगों को बिना डॉक्टर या योग्य आयुर्वेद चिकित्सक की सलाह के (triphala churna) त्रिफला नहीं लेना चाहिए

  1. गर्भवती महिलाएं – गर्भावस्था में त्रिफला का सेवन केवल चिकित्सकीय सलाह पर ही करें।
  2. स्तनपान कराने वाली महिलाएं – कुछ मामलों में यह शिशु पर प्रभाव डाल सकता है इसलिए डॉक्टर से सलाह लें।
  3. 0 -12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को बिना विशेषज्ञ की सलाह के न दें।
  4. दस्त (लूज मोशन) या बार-बार पतले मल की समस्या वाले लोग त्रिफला रेचक (laxative) प्रभाव रखता है जिससे समस्या बढ़ सकती है।
  5. बहुत कमजोर या कुपोषित व्यक्ति इन्हें चिकित्सकीय सलाह के बाद ही सेवन करना चाहिए।
  6. लो ब्लड प्रेशर या बार-बार कमजोरी महसूस करने वाले लोगों को सावधानी आवश्यक है।
  7. डायबिटीज, ब्लड प्रेशर या ब्लड थिनर जैसी दवाएं लेने वाले लोग त्रिफला कुछ दवाओं के साथ परस्पर प्रभाव (interaction) कर सकता है, इसलिए डॉक्टर से सलाह लें।
  8. सर्जरी होने वाली हो ऑपरेशन से लगभग 2 सप्ताह पहले त्रिफला बंद करने की सलाह दी जा सकती है अपने डॉक्टर से पुष्टि करें।
  9. यदि त्रिफला खाने से पेट दर्द, दस्त, एलर्जी या कोई अन्य परेशानी हो सेवन बंद करें और चिकित्सक से संपर्क करें।

महत्वपूर्ण बात

यदि आप पूरी तरह स्वस्थ हैं और त्रिफला को नियमित रूप से लेना चाहते हैं, तो भी 3-5 ग्राम प्रतिदिन से अधिक मात्रा बिना विशेषज्ञ की सलाह के न लें।

आयुर्वेद में एक पारंपरिक मत के अनुसार, ऋतु (मौसम) के अनुसार त्रिफला का सेवन अलग-अलग अनुपान (साथ में ली जाने वाली वस्तु) के साथ किया जाता है। यह विवरण आयुर्वेदिक ग्रंथों में मिलता है, लेकिन सभी दावों की आधुनिक वैज्ञानिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

ऋतु अनुसार त्रिफला सेवन

ऋतुत्रिफला के साथ क्या लें
वसंत (मार्च–अप्रैल)शहद के साथ
ग्रीष्म (मई–जून)गुड़ के साथ
वर्षा (जुलाई–अगस्त)सेंधा नमक के साथ
शरद (सितंबर–अक्टूबर)मिश्री (या देसी खांड) के साथ
हेमंत (नवंबर–दिसंबर)सोंठ चूर्ण के साथ
शिशिर (जनवरी–फरवरी)पिप्पली चूर्ण के साथ

सेवन की मात्रा

  • त्रिफला चूर्ण: 3-5 ग्राम (लगभग ½–1 चम्मच)
  • साथ में मिलाई जाने वाली वस्तु (शहद, गुड़, सेंधा नमक, मिश्री, सोंठ या पिप्पली) त्रिफला की मात्रा का लगभग 1/6 भाग (यह आयुर्वेदिक परंपरा में वर्णित अनुपात है)।

ध्यान रखें

  • यदि आपको डायबिटीज है, तो शहद, गुड़ या मिश्री के साथ सेवन करने से पहले डॉक्टर या आयुर्वेद चिकित्सक से सलाह लें।
  • यदि आप किसी बीमारी के लिए दवा ले रहे हैं, गर्भवती हैं या स्तनपान करा रही हैं, तो त्रिफला का सेवन शुरू करने से पहले विशेषज्ञ से परामर्श करें।
  • सामान्य स्वास्थ्य के लिए अधिकांश लोगों के लिए गुनगुने पानी के साथ त्रिफला लेना भी एक प्रचलित तरीका है।

यह ऋतु-अनुसार सेवन आयुर्वेद की पारंपरिक पद्धति पर आधारित है और व्यक्तिगत प्रकृति (वात, पित्त, कफ) के अनुसार इसमें बदलाव भी किया जा सकता है।

त्रिफला चूर्ण के नुकसान (Side Effects of triphala churna )

हालांकि त्रिफला एक प्रसिद्ध आयुर्वेदिक हर्बल मिश्रण है, लेकिन इसका गलत मात्रा में या बिना सलाह के लंबे समय तक सेवन कुछ लोगों में दुष्प्रभाव पैदा कर सकता है।

1. दस्त (Loose Motion)

त्रिफला का हल्का रेचक (Laxative) प्रभाव होता है। अधिक मात्रा में लेने पर दस्त या बार-बार मल त्याग की समस्या हो सकती है।

2. पेट में ऐंठन या दर्द

कुछ लोगों को शुरुआत में पेट दर्द, गैस, मरोड़ या पेट फूलने की शिकायत हो सकती है।

3. डिहाइड्रेशन (पानी की कमी)

यदि दस्त लंबे समय तक रहें, तो शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो सकती है।

4. ब्लड शुगर कम हो सकती है

कुछ शुरुआती अध्ययनों से संकेत मिलता है कि त्रिफला रक्त शर्करा को प्रभावित कर सकता है। इसलिए डायबिटीज की दवा लेने वाले लोग बिना डॉक्टर की सलाह के इसका सेवन न करें, क्योंकि ब्लड शुगर बहुत कम हो सकती है।

5. दवाओं के साथ प्रभाव (Drug Interactions)

त्रिफला कुछ दवाओं के प्रभाव को बदल सकता है। विशेष रूप से:

  • डायबिटीज की दवाएं
  • ब्लड थिनर (खून पतला करने वाली दवाएं)
  • कुछ अन्य नियमित दवाएं

यदि आप नियमित दवा लेते हैं, तो पहले अपने डॉक्टर से सलाह लें।

6. एलर्जी

दुर्लभ मामलों में कुछ लोगों को त्वचा पर खुजली, लाल चकत्ते या एलर्जी जैसी प्रतिक्रिया हो सकती है।

7. गर्भावस्था और स्तनपान

गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए त्रिफला की सुरक्षा पर पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए बिना चिकित्सकीय सलाह के इसका सेवन नहीं करना चाहिए।

8. अत्यधिक मात्रा का सेवन

जरूरत से अधिक मात्रा लेने से लाभ बढ़ने के बजाय दुष्प्रभाव बढ़ सकते हैं, जैसे

  • बार-बार दस्त
  • पेट दर्द
  • कमजोरी
  • शरीर में पानी की कमी

सुरक्षित सेवन के लिए सुझाव

  • सामान्यतः 3-5 ग्राम प्रतिदिन से अधिक मात्रा बिना विशेषज्ञ की सलाह के न लें।
  • यदि सेवन के बाद लगातार दस्त, पेट दर्द, एलर्जी या कोई अन्य परेशानी हो, तो सेवन बंद कर डॉक्टर से संपर्क करें।
  • त्रिफला किसी भी गंभीर बीमारी (जैसे डायबिटीज, कैंसर, हाई बीपी आदि) की दवा का विकल्प नहीं है। डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाएं बिना सलाह के बंद न करें।

त्रिफला चूर्ण आयुर्वेद की सबसे प्रसिद्ध और पारंपरिक हर्बल औषधियों में से एक है। हरड़, बहेड़ा और आंवला से मिलकर बना यह मिश्रण पाचन तंत्र को बेहतर बनाने, कब्ज से राहत दिलाने, शरीर को एंटीऑक्सीडेंट समर्थन प्रदान करने और समग्र स्वास्थ्य को बनाए रखने में सहायक माना जाता है। आयुर्वेद में इसे एक महत्वपूर्ण रसायन के रूप में वर्णित किया गया है।

हालांकि, यह समझना आवश्यक है कि त्रिफला कोई चमत्कारी औषधि नहीं है और न ही यह डायबिटीज, थायरॉयड, हाई ब्लड प्रेशर, कैंसर या अन्य गंभीर बीमारियों का सिद्ध उपचार है। यदि आप किसी बीमारी की दवा ले रहे हैं या गर्भवती हैं, स्तनपान करा रही हैं या किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे हैं, तो त्रिफला triphala churna का सेवन शुरू करने से पहले डॉक्टर या योग्य आयुर्वेद चिकित्सक से सलाह अवश्य लें।

सही मात्रा, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और स्वस्थ जीवनशैली के साथ त्रिफला का उचित उपयोग आपके स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में सहायक हो सकता है। याद रखें, किसी भी आयुर्वेदिक औषधि का अधिक लाभ तभी मिलता है जब उसका सेवन सही तरीके और विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार किया जाए।

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह लेख केवल सामान्य जानकारी और शैक्षिक उद्देश्य के लिए है। इसे चिकित्सकीय सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी औषधि का सेवन शुरू करने या बंद करने से पहले अपने डॉक्टर या योग्य आयुर्वेद विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

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triphala churna से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

त्रिफला चूर्ण क्या है?

त्रिफला एक पारंपरिक आयुर्वेदिक चूर्ण है, जिसे हरड़, बहेड़ा और आंवला के मिश्रण से तैयार किया जाता है।

त्रिफला चूर्ण के मुख्य फायदे क्या हैं?

आयुर्वेद के अनुसार triphala churna पाचन सुधारने, कब्ज से राहत देने एंटीऑक्सीडेंट समर्थन प्रदान करने और सामान्य स्वास्थ्य बनाए रखने में सहायक माना जाता है।

त्रिफला चूर्ण कब लेना चाहिए?

इसे सामान्यत सुबह खाली पेट या रात को सोने से पहले गुनगुने पानी के साथ लिया जाता है। सही समय व्यक्ति की आवश्यकता और चिकित्सकीय सलाह पर निर्भर करता है।

त्रिफला चूर्ण की सही मात्रा कितनी है?

अधिकांश वयस्कों के लिए सामान्यतः 3-5 ग्राम (लगभग आधा से एक चम्मच) प्रतिदिन पर्याप्त माना जाता है।

क्या त्रिफला रोज़ खाया जा सकता है?

कुछ लोग चिकित्सकीय सलाह के अनुसार नियमित रूप से इसका सेवन करते हैं। लंबे समय तक सेवन करने से पहले विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित है।

क्या त्रिफला कब्ज में लाभदायक है?

आयुर्वेद में त्रिफला को हल्का रेचक (Laxative) माना गया है, इसलिए यह कब्ज से राहत दिलाने में सहायक हो सकता है।

क्या त्रिफला वजन कम करने में मदद करता है?

त्रिफला triphala churna पाचन को बेहतर बनाने में सहायता कर सकता है, लेकिन केवल इसके सेवन से वजन कम होने की गारंटी नहीं है।

क्या त्रिफला डायबिटीज का इलाज है?

नहीं। वर्तमान वैज्ञानिक प्रमाण यह सिद्ध नहीं करते कि त्रिफला डायबिटीज का उपचार है। डॉक्टर की दवाएं बिना सलाह के बंद नहीं करनी चाहिए।

क्या त्रिफला हाई ब्लड प्रेशर को ठीक करता है?

नहीं। त्रिफला हाई ब्लड प्रेशर का प्रमाणित इलाज नहीं है। उपचार के लिए डॉक्टर की सलाह आवश्यक है।

किन लोगों को त्रिफला नहीं खाना चाहिए?

गर्भवती महिलाएं, स्तनपान कराने वाली महिलाएं, छोटे बच्चे, बार-बार दस्त की समस्या वाले लोग और नियमित दवाएं लेने वाले व्यक्ति बिना चिकित्सकीय सलाह के इसका सेवन न करें।

क्या त्रिफला के कोई साइड इफेक्ट्स हैं?

triphala churna अधिक मात्रा में सेवन करने पर दस्त, पेट दर्द, गैस, पेट में ऐंठन या डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

क्या त्रिफला बच्चों को दिया जा सकता है?

नहीं बच्चों को त्रिफला केवल बाल रोग विशेषज्ञ या योग्य आयुर्वेद बाल चिकित्सक की सलाह पर ही देना चाहिए।

क्या त्रिफला गर्भावस्था में सुरक्षित है?

नहीं गर्भावस्था में त्रिफला का सेवन बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं करना चाहिए।

क्या स्तनपान कराने वाली महिलाएं त्रिफला ले सकती हैं?

स्तनपान कराने वाली महिलाओं को त्रिफला लेने से पहले डॉक्टर या आयुर्वेद चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए। इससे शिशु को समस्या हो सकती है।

त्रिफला को कितने समय तक लिया जा सकता है?

यह व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति और उद्देश्य पर निर्भर करता है। लंबे समय तक सेवन करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।

त्रिफला को किसके साथ लेना चाहिए?

सामान्यतः इसे गुनगुने पानी के साथ लिया जाता है। आयुर्वेद में ऋतु के अनुसार शहद, गुड़, मिश्री, सोंठ आदि के साथ सेवन का भी उल्लेख मिलता है।

क्या त्रिफला शरीर को डिटॉक्स करता है?

आयुर्वेद में त्रिफला को शरीर की प्राकृतिक शुद्धि प्रक्रिया में सहायक माना गया है, लेकिन “डिटॉक्स” संबंधी दावों के लिए वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं।

क्या त्रिफला आंखों के लिए लाभदायक है?

आयुर्वेद में त्रिफला को नेत्र स्वास्थ्य के लिए उपयोगी बताया गया है, लेकिन आंखों की किसी बीमारी के उपचार के लिए डॉक्टर की सलाह आवश्यक है।

त्रिफला चूर्ण को कैसे सुरक्षित रखें?

इसे एयरटाइट कंटेनर में, ठंडी और सूखी जगह पर रखें तथा नमी और सीधी धूप से बचाएं।

क्या त्रिफला सभी लोगों के लिए सुरक्षित है?

नहीं। प्रत्येक व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति अलग होती है। यदि आप किसी बीमारी की दवा ले रहे हैं या किसी विशेष स्वास्थ्य समस्या से ग्रस्त हैं तो त्रिफला का सेवन शुरू करने से पहले डॉक्टर या योग्य आयुर्वेद चिकित्सक से परामर्श अवश्य करें।

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