Ashoka Samrat

चक्रवर्ती अशोक सम्राट | Chakravartin Ashoka Samrat full episode1| चक्रवर्ती अशोक सम्राट सीरियल के सभी फुल एपिसोड्स

इस पोस्ट में आप जानेंगे

चक्रवर्ती अशोक सम्राट (भाग 1) Chakravartin Ashoka Samrat episode 1

यह कहानी नहीं है बल्कि एक जीवन यात्रा हैं अखंड भारत के स्वप्न को साकार करने वाले मौर्य वंश के चक्रवर्ती अशोक सम्राट ( Chakravartin Ashoka Samrat ) की जो मगध साम्राज्य पर 36 वर्षों तक शासन कर सबसे महान सम्राट बना अशोक के पिता सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य ने मगध को अखंड साम्राज्य के रूप में स्थापित कर उसे समृद्ध बनाया था।

महान चंद्रगुप्त मौर्य के सिंहासन त्यागने के बाद उनके पुत्र सम्राट बिंदुसार मगध के शासक बने। सम्राट बिंदुसार के सम्राट बनने के पश्चात मगध के कई शत्रु मगध पर अध्यापत स्थापित करने के लिए आतुर हो उठे। सिकंदर के सेनापति सेल्यूकस निकेटर की पुत्री हेलेना और सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य के बीच हुए वैवाहिक गठबंधन के पश्चात कई शत्रु भीतर तक घुसपैठ कर चुके थे।

किंतु बाहरी शत्रुओं की अपेक्षा अधिक समस्या थी आंतरिक शत्रुओं की कुछ अवश्य ही होगा इसका आभास आचार्य चाणक्य को पहले ही हो चुका था परंतु क्या होगा अब होगा कैसे होगा इसका अनुमान लगा पाना मुश्किल हो रहा था।

आचार्य चाणक्य

अखंड मंडलाकारं व्याप्तं येन चराचरमतत पदम् दर्शितं येन तस्मै श्री गुरवे नमः

अर्थात : जो अखण्ड है,सकल ब्रह्मांड में समाया है, चर-अचर में तरंगित है,उस(प्रभु)के तत्व रूप को,जो मेरे भीतर प्रकट कर,मुझे साक्षात दर्शन करा दे,उन गुरु को,मेरा शत-शत नमन है। अर्थात वही पूर्ण गुरु है।

आचार्य चाणक्य मगध के असुरक्षित होने का पूर्वानुमान

आचार्य चाणक्य निंद्रा अवस्था में मगन रहते हैं तभी उन्हें स्वप्न में सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य एक शेर के रूप में मगध के सिंहासन के पास दिखाई देते हैं और उन पर आक्रमण करने का प्रयास करते हैं तभी आचार्य चाणक्य की निंदा भंग हो जाती है और वह उठ कर बैठ जाते हैं तभी उनके पास उनके शिष्य राधा गुप्त पास आते हैं

राधा गुप्त पास आकर आचार्य चाणक्य से पूछते हैं कि आपके इतना विचलित होने का कारण क्या है तब आचार्य चाणक्य राधा गुप्त को अपने स्वप्न के बारे में बताते हैं कि उन्होंने सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य को वनराज (सिंह) के रूप में देखा तब राधा गुप्त कहते हैं कि आचार्य यह तो मगध पर संकट आने का संकेत है।

आचार्य चाणक्य कहते है कि यह तो आने वाला समय ही बताएगा परंतु यह निश्चित है कि भविष्य में होने वाली किसी महत्वपूर्ण घटना का संकेत ही दे रहे थे सम्राट चंद्रगुप्त। और अब वर्तमान सम्राट बिंदुसार इस समय इन घटनाओं से अनभिज्ञ चंपा नगरी में थे। जहां मीर खुरासन द्वारा आयोजित खेल की शुरुआत होने वाली है

सम्राट बिंदुसार

सम्राट बिंदुसार के साथ इस खेल में उनके बड़े भाई जस्टिन और उनकी मां राजमाता हेलना और सम्राट बिंदुसार की पहली धर्म पत्नी महा रानी चारूमित्रा तथा अमात्य उग्रसेन भी है और इस खेल की आड़ में कौन-कौन सी चाल चली जाने वाली है यह शीघ्र ही स्पष्ट हो जाएगा।

इस खेल में एक जानवर की खाल की खाल को उठाकर भागना होता है जो भी घुड़सवार इस खाल को लेकर सबसे पहले तय की गई दूरी तक पहुंचता है वही विजय होता है। सम्राट बिंदुसार और उनके बड़े भाई जस्टिन तथा अन्य घुड़सवार एक साथ दौड़ते हैं परंतु सम्राट बिंदुसार सबसे पहले उस खाल को लेकर आगे बढ़ने का प्रयास करने लगते हैं।

तभी खेल प्रतियोगिता में बैठे उनकी पहली धर्मपत्नी महारानी चारुमित्रा अपनी गोद में बिठाए हुए अपने बड़े बेटे को जोक एक या 2 वर्ष का होगा जिसका नाम सुशीम है को संभालते हुए कहती हैं कि देखा सुशीम तुम्हारे पिता को पराजित करना समस्त संसार में किसी के लिए संभव नहीं है । परंतु यह क्या सम्राट बिंदुसार के हाथ से उनका बड़ा भाई जस्टिन उस खाल को छीन लेता है और अधिक तीव्र गति से भागने लगता है

सम्राट बिंदुसार और जस्टिन परस्पर गति से भाग ही रहे होते हैं की तभी उन दोनों के बीच एक तीसरा घुड़सवार भी आ जाता है तीसरा घुड़सवार जस्टिन की ओर देखता है जस्टिन जैसे ही उस सवार की आंखों को देखता है वह सममोहित हो जाता है क्योंकि यह कोई पुरुष नहीं बल्कि मीर खुरासन की बेटी नूर है।

नूर इस मौके का फायदा उठाती है जस्टिन के हाथ से उस खाल को छीन लेती है नूर विजय ध्वज के समीप पहुंचने वाली ही होती है की तभी बिंदुसार पीछे से की तीव्र गति से आता है और नूर के पास से कुछ खाल को छीन कर विजय ध्वज की ओर आगे बढ़ जाता है और विजई हो जाता है।

सभी सम्राट बिंदुसार की जय जयकार करने लगते हैं सम्राट उस खाल को लेकर राजमाता हिलाना के पास जाते है और उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेते हैं। तभी उनके बड़े भाई जस्टिन कहते हैं कि अनुज अच्छा हुआ आपने यह प्रतियोगिता जीत ली नहीं तो एक सुंदर स्त्री से पराजित होना ना तो मौर्य वंश को शोभा देता ना ही मौर्य वंश के सम्राट को।

राजमाता हेलेना कहती है कि हमें गर्व है कि आप हमें अपनी माता होने का सम्मान देते है बिंदुसार कहता है यह तो मेरे लिए गर्व की बात है कि आपने मुझे अपने वात्सल्य और प्रेम के लायक समझा है अन्यथा मेरी जननी कि असमय मृत्यु के पश्चात मैंने आपसे ही सीखा है की मां का वात्सल्य क्या होता है, मां का अर्थ क्या होता है

यदि किसी समय मुझे आपके लिए प्राण भी ध्यान में पड़े तो एक क्षण के लिए भी इंतजार नहीं करेगा बिंदुसार।राजमाता हेलेना कहती है कि आप यदि ऐसा सोचते हैं तो मैं अपना दायित्व निभाने में सफल हुई हूं।

मीर खुरासन

तभी मीर खुरासन सम्राट बिंदुसार के समीप आता है और उन्हें विजय होने की मुबारकबाद देता है और इसके साथ ही वहां पर उद्घोषणा करता है कि आज आप सब की हाजिरी में मीर खुरासन यह ऐलान करता है कि आज से मीर खुरासन की सारी असकरी (सेना) मीर खुरासन कसारा असल खाना (हथियार रखने का स्थान) मीर खुरासन की दुख्तर (बेटी) पर मगध के अमीर बिंदुसार का हक होगा।

इसके साथ ही एक बार फिर सम्राट बिंदुसार की जय जय कार के नारे लगने लगते हैं महारानी चारु मित्रा अचंभित होकर सम्राट को देखती है परंतु यह उद्घोषणा सुनकर राजमाता हेलेना के मुख पर खुशी की लहर दौड़ जाती है।

तभी नूर का भाई नूर के पास आता है और कहता है वल्लाह हमारा खबाहर मगध का मल्लिका बनेगा रानी मौर्य नूर कहती है नहीं बिरादर महारानी नूर मौर्य कहो सिर्फ मगध की ही नहीं बल्कि मीर बिंदुसार के दिल की भी महारानी कहो। नूर अपने पिता खुरासन के पास जाती है और खुरासान उसे मुबारकबाद देता है

इधर महारानी चारुमित्रा को राजमाता हेलेना चिंतित देख उससे कहती है कि नूर खुरासान बहुत ही सुंदर है परंतु सम्राट ने सिर्फ उसकी सुंदरता की वजह से उसके विवाह प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है बल्कि 500 जनपदों में सर्वश्रेष्ठ जनपद मगध को अपना खुर्श और अपनी सेना मगध को दे रहा है।

क्यों अमात्य उग्रसेन मैंने सत्य कहा ना अवश्य राजमाता यथार्थ कहा आपने सम्राट की अनेकों रानियां होती है किंतु महारानी बनने का उनके उत्तराधिकारी की माता बनने का सौभाग्य किसी एक को प्राप्त होता है महारानी चारुमित्रा आप अत्यंत भाग्यशाली की सम्राट के जेष्ठ पुत्र युवराज सुशीम की माता बनने का सौभाग्य आपको प्राप्त हुआ है। पुनः सम्राट बिंदुसार की प्रजा जय जयकार करने लगती है सम्राट बिंदुसार प्रजा को हाथ उठाकर संबोधित करते हुए शांत करते हैं।

आचार्य चाणक्य और राधा गुप्त की वार्तालाप

आचार्य चाणक्य को चिंतित देखकर राधा गुप्त पूछते हैं क्या हुआ आचार्य

आचार्य चाणक्य – मौर्य वंश के रक्त में खुरासनी वंश का रक्त भी मिश्रित होगा

राधा गुप्त – अर्थात सम्राट बिंदुसार का विवाह

आचार्य चाणक्य – अपनी पुत्री के साथ-साथ अस्त्र शास्त्र समस्त कोषागार और संपूर्ण सैन्य बल को खुरासन सब कुछ बिंदुसार को देने का निर्णय कर चुका है।

राधा गुप्त – तो क्या ये मगध के हित में नहीं खुरासान धानी राज्यों में से है और उसकी सैन्य शक्ति भी बहुत अच्छी है और यदि मगध को !

आचार्य चाणक्य बीच में बात को काटते हुए कहते है की दूसरी नहीं तिसरी चाल को पहचानना सीखो राधा गुप्त खुरासन बहुत ही धूर्त है मगध के सिंहासन पर दृष्टि है उसकी वह अपनी पुत्री के माध्यम से मगध के सिंहासन हो प्राप्त करना चाहता है पहले यूनानी क्या कम है जो अब ये फारसी भी आ गए यदि यह विवाह हुआ तो ना केवल मगध का सैन्य बल, कोषागार अपितु बिंदुसार की सेज पर भी खुरासनी वर्चस्व होगा।

सम्राट बिंदुसार का शिकार खेलने के लिए प्रस्थान करना

राजभवन में राजमाता हेलेना अपने पुत्र जस्टिन को आदेश देती हैं कि सम्राट बिंदुसार शिकार खेलने के लिए जा रहे है तुम जाकर राज्य के कार्य में सहयोग दो। और अमात्य उग्रसेन को आदेश देती है की सम्राट शिकार खेलने जा रहे हैं उनकी सुख सुविधा का पूरा ध्यान रखा जाए।

उग्रसेन कहते हैं अवश्य राजमाता सम्राट की सुख सुविधा का पूरा ध्यान रखा जाएगा उन्हें किसी प्रकार का कोई कष्ट नहीं होगा इधर सम्राट अपने सैनिकों के साथ तैयार होकर शिकार के लिए राजमहल से निकल रहे होते हैं कि राजभवन के मुख्य द्वार पर आचार्य चाणक्य अपने शिष्यों के साथ उनसे मुलाकात करते हैं।

सम्राट बिंदुसार घोड़े से उतर कर आचार्य चाणक्य का अभिवादन करते हैं और कहते हैं कि आपने यहां आने का कष्ट क्यों किया मुझे आदेश दे दिया होता मैं स्वयं आपके पास आ जाता है आप राजभवन में पधारे हैं और मैं आखेट के लिए वन में जा रहा हूं आचार्य चाणक्य कहते हैं चारों ओर संकट के बादल घिरे हुए और सिर्फ आप ही नहीं और भी कोई आखेट के लिए घात लगाए बैठा हुआ है और लक्ष्य है मगध का सिंहासन।

बिंदुसार कहते हैं की यह तो तभी संभव है जब कोई मेरे प्राण ले मुझे यह सुनकर प्रसन्नता हुई कि कोई मेरा भी शत्रु है जो मेरा अंत चाहता है परंतु यह शत्रुता इस बात का प्रमाण है कि मैं अच्छा कार्य कर रहा हूं और अपने प्रजा के दायित्व का अच्छे से निर्वाहन कर रहा हूं। मगध की भाग्य रेखा इतनी भी छोटी नहीं है कि कोई भी उसका अंत कर सकें आप राजमहल में विश्राम कीजिए मैं आखेट से लौटकर आपसे पुनः वेट करूंगा। अब आप मुझे अनुमति दिजिए।

सम्राट बिंदुसार अपने सैनिकों के साथ वन में पहुंच जाते हैं और घोड़े पर बैठे हुए मदिरापान का आनंद दे रहे होते कि तभी उन्हें बाराह (जंगली सूअर) के होने का अंदेशा होता है सभी सैनिक उस की ओर बढ़ते हैं परंतु सम्राट उन्हें रोक देते हैं और स्वयं घोड़े से उतर कर शुगर का पीछा करने लगते हैं।

कुछ दूर भागने के पश्चात सम्राट जंगली सूअर का शिकार करने में सफल हो जाते हैं और यह कहते हैं शीघ्र ही मेरा विवाह होने वाला है और इस बाराह का सेवन कर के हम उत्सव मनाएंगे

तभी अचानक एक तीर आकर सम्राट के सीने पर लगता है सम्राट भी संभल रहे होते हैं की दूसरा तेरा कर उनके पास खड़े सैनिको लगता है जब तक वह सभी लोग स्थिति का सामना करने के लिए तैयार हो पाते तब तक उन पर अज्ञात शत्रु ने हमला कर दिया जो कि पहले से ही चुप कर घात लगाए हुए बैठे थे।

रानी नूर का भाई सम्राट को जाने के लिए कहता है तभी तेरा कर उसके सीने में भी लगता है और वह भी मृत्यु को प्राप्त हो जाता है सम्राट स्थिति को देखते हुए वहां से भागने में सफल हो जाते हैं परंतु उनके सारे सैनिक मारे जा चुके थे सम्राट बिंदुसार वहां से भागकर एक झरने के पास पहाड़ी पर पहुंच जाते हैं।

सम्राट बिंदुसार सीने में लगे हुए तीर को निकालने का प्रयास करते हैं परंतु तीर को निकालने में असफल रहते हैं और झरने में गिर जाते हैं पीछे से एक सैनिक आता है और देखते हैं कि सम्राट बिंदुसार पानी की गहरी जलधारा में गिर गए हैं अतः उसे विश्वास हो जाता है किस सम्राट बिंदुसार की मृत्यु हो गई है।

वन में सम्राट बिंदुसार पर शत्रुओं का आक्रमण

वन में कुछ कन्याएं पूजा के लिए पुष्प एकत्रित करने के लिए वन में विचरण कर रही होती है और तभी वहां उसका स्थान पर पहुंच जाता है जहां पर सम्राट बिंदुसार और अज्ञात शत्रुओं के बीच मुठभेड़ हुई थी वहां पर बहुत से सैनिकों को जमीन पर धराशाई अवस्था में देखती है और जोर-जोर से आवाज लगाती हैं – सुभद्रागिं- सुभद्रागिं-सुभद्रागिं

सुभद्रागिं ऋषि कन्याओं की आवाज को सुनकर अपनी कुटिया से प्रकृति से भागते हुए बाहर आती है और दौड़ती हुई घटनास्थल पर पहुंच जाती है और सभी सैनिकों को मृत अवस्था में देखकर कहती है सभी मनुष्य में देवता भी होते हैं और दानों भी होते हैं सिर्फ अंतर है तो अहंकार का जिसने अहंकार पर विजय पा लिया वह देवता हो जाता है और जो अहंकार से पराजित हो गया वो दानव।

और किसी को अहंकार से पराजित करने का सबसे सरल उपाय हैं की उसके हाथ में शास्त्र सौंप दो तभी एक सैनिक जोकि अत्याधिक घायल अवस्था में उसके सामने पड़ा होता है वह हाथ उठाकर कुछ इशारा करता है और सुभद्रागिं अपनी एक सहेली से अति शीघ्र जल लाने के लिए कहती है परंतु वह जल लेकर आऐ इससे पहले सैनिक अपना प्राण त्याग देता है।

सुभद्रागिं सैनिक द्वारा इशारा की गई दिशा की ओर देखती है तब उसे जमीन पर रक्त की बूंदे दिखाई देती है और वह उसके साथ आगे बढ़ती जाती है और झरने की उस पहाड़ी पर पहुंच जाती है जहां से सम्राट बिंदुसार जलधारा में गिर गए थे वह पहाड़ी से उतर कर झरने की तलहटी में पहुंचती है

ईधर राजभवन में एक घुड़सवार सैनिक तीव्र गति से प्रवेश करता है और अमात्य उग्रसेन के पास आकर रूकता है और घोड़े से उतर कर आम अमात्य उग्रसेन को सम्राट बिंदुसार का मुकुट और तलवार सौंप देता है अमात्य सम्राट के मुकुल और तलवार को लेकर राजमाता हेलेना के समीप जाता है राजमाता हेलेना सम्राट के रक्त रंजित मुकुट और तलवार को देखकर कहती हैं कि शीश मांगा था।

अमात्य उग्रसेन कहते हैं कि यदि हमारे सैनिक थोड़ी देर और ठहरते तो अवश्य ही उन्हें कोई देख लेता परंतु आप निश्चिंत रहें राजमाता सम्राट के जीवित रहने की अब कोई संभावना नहीं इधर सुभद्रागिं सम्राट के पास पहुंच कर उन्हें जल से बाहर निकालती हैं और सम्राट की सीने में लगे हुए बांण निकाल देती है।

सुभद्रागिं अपनी सहेली अनुमिता को आदेश देती है अति शीघ्र औषधि लेकर आओ और उसके पास मौजूद उसकी सभी सहेलियां सम्राट के उपचार में लग जाती है इधर राजमाता हेलेना अपने पुत्र जस्टिन से कहती हैं चाणक्य ने तुम्हें सम्राट नहीं बनने दिया तो उसका मूल्य बिंदुसार को चुकाना पड़ा सम्राट बिंदुसार की मृत्यु का समाचार राज्य के कोने कोने में फैल जाना चाहिए।

सभी शत्रुओं को भय था और भी बहुत समय से अपनी स्वतंत्रता के लिए व्याकुल थे अब उन्हें नियंत्रित करने के लिए मगध में कोई सम्राट नहीं है चारों तरफ अराजकता फैल जाने दो, विद्रोह करने दो उन्हें डर फैलने दो प्रजा में जलने दो मगध को। और इधर प्रजा में हाहाकार मच जाता है किस सम्राट बिंदुसार की हत्या कर दी गई है।

मगध के शत्रुओं ने आक्रमण कर दिया है सभी अपनी जान बचाकर भागो यहां से तभी एक शत्रु आता है और कहता है कि सम्राट ने यह प्रांत मेरे पिता से छीना था इस पर अब मेरा अधिकार है सभी लोग मेरे राज्य के अधिकारियों को राज्य कर देंगे आज से मैं तुम्हारा शासक हूं मीरभद्र। और मीरभद्र के सैनिक उसकी जय जयकार करने लगते हैं।

आचार्य चाणक्य अराजकता फैलने का आभास

आचार्य चाणक्य के शिष्य कहते हैं की यदि शीघ्र ही इस विद्रोह को नियंत्रित नहीं किया गया तो आप हंट भारत खंड खंड हो जाएगा, तभी दूसरा शिष्य कहता है परंतु इस विद्रोह को रोकेगा कौन तभी आचार्य चाणक्य अपने भवन से निकलकर मगध की राज भवन की ओर देखते हैं और उन्हें सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य जोकि एक सिंह के रूप में आचार्य चाणक्य को संकेत देते हैं।

आचार्य चाणक्य मगध के सबसे ऊंचे पहाड़ पर एक शेर की दहाड़ सुनाई देती है जिसका आभास आचार्य चाणक्य होता है वह से कोई और नहीं बल्कि मगध के सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य होते हैं जिसे देखकर आचार्य को ज्ञात हो जाता है की अराजकता फैली नहीं है बल्कि फैलाई गई है।

मगध की प्रजा के साथ मैं यह अन्याय कभी होने नहीं दूंगा वह जो भी है मगध का शत्रु है मगध की निर्दोष प्रजा का निकंदन करके मगध के सिंहासन पर आरूढ़ होना चाहता है वो किंतु उसका यह दुस्वप्न मैं कभी पूर्ण होने नहीं दूंगा।

सेल्यूकस निकेटर,राजमाता हेलेना और जस्टिन की गुप्त वार्तालाप

राजमाता हेलेना और उनका पुत्र जस्टिन दोनों भेष बदलकर गुप्त रूप से राजमाता की पिता सेल्यूकस निकेटर से मिलने जाते हैं जोकि एक यूनानी है राजमाता हेलेना अपने पिता के पास पहुंचकर कहती हैं कि अब मगध पर आक्रमण करने का समय आ चुका है सेल्यूकस निकेटर कहता है कि बेटी हेलेना और जस्टिन मुझे चंद्रगुप्त मौर्या से हारे हुए इतने साल बीत गए और इतने सालों में एक भी दिन ऐसा नहीं है कि उस बेज्जती की वजह से सेल्यूकस निकेटर का खून ना खौला हो।

यह सिर्फ मेरी नहीं बल्कि पूरी मकदूनिया (यूनान का एक राज्य) की बेइज्जती है इतने सालों में सेल्यूकस निकेटर ने मगध को हासिल करने की तैयारी के अलावा और किया भी क्या है। बोलो कब करना है आक्रमण ! जस्टिन उस सिंहासन पर बैठेगा उससे पहले वह दक्षिण में हो रहे विद्रोह को शांत करने के लिए सेना भेजेगा और आप उत्तर दिशा से मगध पर हमला करेंगे।

सभी सभाजादो की हत्या होगी और मौर्य वंश का नामोनिशान मिटा दिया जाएगा और फिर मगध हमारा होगा सेल्यूकस निकेटर कहता है कि मुझे तुम्हारी सोच पर गर्व है बेटी हेलेना। सेल्यूकस निकेटर का अपनी बेटी के बिना पूरा होता ही नहीं और मैं देख रहा हूं तुमने अपने बेटे को आने वाली जिम्मेदारी के लिए बखूबी तैयार किया है।

जस्टिन कहता है मां से मुझे रोज ही कुछ नया सीखने को मिलता है याद रखो जस्टिन सॉल्यूशेट वंश का भविष्य हो तुम और जस्टिन कहता है की नूर खुरासन का भी

इधर नूर खुरासन और उसके पिता मीर खुरासन अपने पुत्र की अंतिम संस्कार करने की योजना बना रहे होते हैं तभी आचार्य चाणक्य वहां पर आते हैं परंतु मीर खुरासन के सैनिक उन्हें रोक देते हैं परंतु मीर खुरासन सैनिकों को रोक देता है और आचार्य चाणक्य आने के लिए आमंत्रित करता है।

आचार्य चाणक्य मीर खुरासन के पास पहुंचकर हाथ जोड़कर कहते हैं कि मीर मैं तुम्हारे पुत्र का शोक व्यक्त करने आया हूं एक पिता के लिए पुत्र का शोक क्या होता है इसकी मैं कल्पना भी नहीं कर सकता मीर कहता है चाणक्य संपूर्ण मगध जानता है कि आप खुरासन के हितैषी नहीं है

आचार्य चाणक्य कहते हैं यह सत्य है मीर परंतु यह भी सत्य है कि आप के पुत्र की असमय मृत्यु के पश्चात आपका और मगध का शत्रु एक ही है और उस शत्रु को पराजित करने के लिए मगध को आपका साथ चाहिए उतना ही जितना कि आपको अपने पुत्र के प्रतिशोध हेतु मगध का। मीर कहता है कौन है वो।

आचार्य चाणक्य कहते हैं इस षड्यंत्र में आपको यूनानी दुर्गंध नहीं आ रही है मीर कहता है यह आप कैसे जानते हो आचार्य चाणक्य कहते हैं क्या यह पर्याप्त नहीं है आईएमएफ हम दोनों एकत्र होकर अपने शत्रु को परास्त करें और सम्राट बिंदुसार पुनः स्थापित करें।

आचार्य चाणक्य आप होश में तो है सम्राट बिंदुसार इस हमले में फक्त (मृत्यु) हो चुके हैं नहीं मीर जब तक मैं सम्राट बिंदुसार के पार्थिव को नहीं देख लेता तब तक वह मेरे लिए जीवित ही है मीर खुरासन आप सम्राट को ढूंढिए क्योंकि ऐसे समय में मैं आपके अतिरिक्त किसी और पर विश्वास नहीं कर सकता क्योंकि सम्राट के जीवित लौटने पर ही आपकी बेटी का भविष्य समृद्ध और उज्जवल है।

इधर राजभवन मे अमात्य उग्रसेन सभा को संबोधित करते हुए कहते हैं कि यह कैसी स्थिति उत्पन्न हुई है कि हम सम्राट की असमय मृत्यु का शोक भी नहीं मना सकते चारों तरफ अराजकता फैली हुई है सभी जनपदों ने विद्रोह कर दिया है मगध असुरक्षित असहाय और दिशाहीन हो गया है राजमाता। मौर्य वंश में जिस अखंड भारत को स्थापित किया था वह अखंड भारत अब खंडित होने को है।

यदि हम इस विद्रोह को नहीं रोकते हैं तो यह सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य और सम्राट बिंदुसार के लिए अत्याधिक अपमानास्त होगा इस स्थिति को नियंत्रित करने का सिर्फ एक ही उपाय है की मगध के सिंहासन पर नए राजा का आसीन करना। राजमाता कहती है कि इसमें इतना विचार विमर्श करने की क्या आवश्यकता है युवराज सुशीम के राज्याभिषेक की तैयारी की जाए।

अमात्य उग्रसेन कहते है की युवराज सुशीम अभी बाल अवस्था में उनकी उम्र मात्र 1 वर्ष हमें प्रतीक मात्र राजा की आवश्यकता नहीं है बल्कि हमें ऐसे व्यक्ति की आवश्यकता है जो कि शासन को चला सके जिसमें निर्णय लेने का सामर्थ्य और मेरी नजर में एक ही ऐसा व्यक्ति है जो इस सिंहासन के योग्य है और वह है राजकुमार जस्टिन।

तभी राजमाता हेलेना उनके प्रस्ताव को खंडित करती हैं और कहती हैं यह उपयुक्त नहीं है और जस्टिन भी उनकी इस बात का समर्थन करता है परंतु अमात्य उग्रसेन उनसे पुनः निवेदन करते हैं कि जा समय विचार विमर्श करने का नहीं है और सभा में उपस्थित कुछ अमात्यो (सभापति) से पूछते हैं की क्या मेरा निर्णय सही नहीं है।

सभी लोग कहते हैं हमें इस प्रस्ताव से कोई दुविधा नहीं है परंतु हमें एक बार राजा खुरासन से विचार विमर्श कर लेना चाहिए तभी एक सभापति कहता है कि मीर खुरासन कहां पर है। तभी एक सैनिक कहता है कि मीर खुरासन अपने पुत्र के शोक में शोकमग्न है परंतु मीर खुरासन गुप्त रूप से सम्राट बिंदुसार की खोज में निकल जाते हैं और अपनी पुत्री नूर को या आश्वासन देते हैं कि वह यदि जीवित है तो सम्राट बिंदुसार को लेकर अवश्य लौटेंगे।

इधर राजमाता हेलेना अमात्य उग्रसेन के प्रस्ताव को स्वीकार कर लेती है और कहती है कि यदि सभी यही चाहते हैं तो हमें स्वीकार है और अपने पुत्र जस्टिन को संबोधित करते हुए कहती है कि तुम्हें सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य के लिए मगध के लिए सभा के द्वारा लिए गए निर्णय का निर्वाहन करना ही होगा और जस्टिन आप की सहमति में अपना सिर झुका देता है।

इधर सुभाद्रंगी और उसकी सभी सहेलियां सम्राट को होश में लाने के लिए निरंतर प्रयास करती रहती है और अंततः उन्हें आभास हो जाता है की सम्राट जीवित है।

ये था चक्रवर्ती अशोक सम्राट धारावाहिक का भाग 1

हम जल्द ही प्रयास करेंगे कि आपके लिए आप भाग 2 की प्रस्तुति अतिशीघ्र कर सकें।

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FAQ

चक्रवर्ती अशोक सम्राट कौन थे?

चक्रवर्ती अशोक सम्राट महान चंद्रगुप्त मौर्य के पौत्र और सम्राट बिंदुसार के पुत्र थे।

आचार्य चाणक्य कौन थे?

आचार्य चाणक्य मौर्य वंश के संस्थापक और सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य के गुरु थे।

चक्रवर्ती अशोक सम्राट की माता का क्या नाम था?

चक्रवर्ती अशोक सम्राट की मां का नाम सुभद्रागिं था।

सम्राट बिंदुसार के पिता का क्या नाम था?

सम्राट बिंदुसार के पिता का नाम चंद्रगुप्त मौर्य था

चक्रवर्ती अशोक सम्राट का इतिहास आप यहां पर फ्री में पढ़ सकते हैं

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